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जमुई में शराब तस्करी गिरोह का भंडाफोड़, मास्टरमाइंड समेत 5 गिरफ्तार, नाबालिगों के इस्तेमाल का खुलासा

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जमुई पुलिस ने अवैध शराब तस्करी गिरोह का खुलासा करते हुए मास्टरमाइंड समेत 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरोह में नाबालिगों के इस्तेमाल का भी चौंकाने वाला मामला सामने आया है।

जमुई/आलम की खबर:जमुई जिले में अवैध शराब तस्करी के खिलाफ पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है, जहां एक संगठित शराब तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए मास्टरमाइंड समेत कुल पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इस कार्रवाई ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है क्योंकि जांच के दौरान यह भी खुलासा हुआ है कि इस गिरोह में नाबालिग बच्चों को भी अवैध कारोबार में शामिल किया गया था। पुलिस ने एक सिल्वर रंग की स्विफ्ट डिजायर कार से 17 बियर केन बरामद किए हैं और वाहन को जब्त कर लिया गया है। यह पूरी कार्रवाई जमुई के पत्नेश्वर चौक के पास एसडीपीओ सतीश सुमन के नेतृत्व में चल रहे सघन वाहन जांच अभियान के दौरान की गई, जिसमें थानाध्यक्ष शेखर सौरभ, एसआई पंकज कुमार और एएसआई सुनील कुमार की टीम शामिल थी। जांच के दौरान पुलिस ने संदिग्ध कार को रोकने का इशारा किया लेकिन कार सवार भागने की कोशिश करने लगे, जिसके बाद पुलिस ने घेराबंदी कर सभी को मौके पर ही दबोच लिया। तलाशी के दौरान कार की डिक्की में रखे काले पिट्ठू बैग से 17 बियर केन बरामद हुए, जिसके बाद सभी आरोपियों को हिरासत में ले लिया गया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान साव टोला निवासी राजीव उर्फ राजू कुमार (19), अभिषेक कुमार (19), धर्मेंद्र कुमार (22), रिशु कुमार (22) और रूपेश कुमार पांडेय (21) के रूप में हुई है। पुलिस जांच में यह सामने आया है कि इस पूरे गिरोह का मास्टरमाइंड राजीव उर्फ राजू कुमार है, जो लंबे समय से शराब तस्करी के नेटवर्क को संचालित कर रहा था। बताया जाता है कि वह पहले मलयपुर क्षेत्र में किराना दुकान और तेल मिल की आड़ में अवैध शराब का भंडारण करता था और बाद में ऑनलाइन ऑर्डर के जरिए सप्लाई करता था। पुलिस द्वारा पहले भी उस पर कार्रवाई की गई थी, लेकिन वह फरार हो गया था और फिर से इस अवैध कारोबार में सक्रिय हो गया। जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि इस नेटवर्क में दो नाबालिग बच्चों को भी शामिल किया गया था, जिन्हें कम पैसे और लालच देकर डिलीवरी के काम में लगाया जाता था। शराब की खेप झारखंड के जसीडीह से मंगाई जाती थी और इन्हीं नाबालिगों के जरिए स्थानीय इलाकों में सप्लाई की जाती थी। प्रत्येक डिलीवरी पर उन्हें मात्र 200 से 300 रुपये दिए जाते थे, जबकि मुख्य नेटवर्क को एक खेप पर लगभग 2000 रुपये तक की कमाई होती थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस अवैध कारोबार से आरोपियों ने काफी संपत्ति अर्जित कर ली थी और कई युवाओं को भी पैसे और आसान कमाई का लालच देकर इस धंधे में शामिल कर लिया गया था। फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है और यह पता लगाने में जुटी है कि यह शराब किन-किन इलाकों में सप्लाई की जाती थी और इस गिरोह के पीछे और कौन-कौन लोग शामिल हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि नाबालिगों को इस तरह के अवैध धंधे में शामिल करना गंभीर अपराध है और सभी पहलुओं पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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